जी. एन. बाजपेयी और प्रवीण तिवारी

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वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत को निर्णायक भूमिका निभाने का अवसर

नेतृत्व ग्रहण करने के लिए आंतरिक शक्ति और वैचारिक दृष्टिकोण—दोनों की आवश्यकता होती है। जहाँ दुनिया भारत को एक बड़े बाज़ार के रूप में देखती है, वहीं भारत को उन रणनीतिक क्षेत्रों में बाज़ार नेता बनना चाहिए जहाँ आत्मनिर्भरता और निर्यात की संभावनाएँ हैं। इनमें अंतरिक्ष, रक्षा, एरोनॉटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर्स और कुशल मानव संसाधन…